The History of Hindu India (Part 1)

With Hindi Subtitles

शीर्षक: हिन्दू भारत का इतिहास विवरण : हिन्दू भारत का इतिहास (भाग एक) का निर्माण हिंदूइस्म टुडे पत्रिका के संपादकों द्वारा डॉ शिवा बाजपेयी, कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी नॉर्थरिज के इतिहास के प्रोफेसर एमेरिटस, के सहयोग से किया गया था। इसका इरादा अमेरिका के छठी श्रेणी की दुनियां के इतिहास की कक्षाओं में भारत और हिन्दू धर्म के इतिहास को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने  के लिए, साथ ही साथ हिन्दू मंदिर अध्ययन समूहों और हिन्दू धर्म एवं इतिहास की सामान्य प्रस्तुतियों के लिए भी इस्तेमाल करने का है। वृत्तचित्र, 2011 में प्रकाशित पाठ्यपुस्तक , हिन्दू भारत के इतिहास के पहले अध्याय पर आधारित है. और अधिक जानकारी के लिए और कक्षा के सबक की योजनाओं जो पुस्तक पर आधारित हैं, इस वेबलिंक www.hinduismtoday.com/education/ पर जाएं। ओबेरॉय फाउंडेशन इंस्टिट्यूट फॉर करिकुलम एडवांसमेंट द्वारा इसे अनुदानित किया गया है. इसे शैक्षिक उद्देश्यों के लिए वितरित करने की पूरी आज़ादी है.


Transcript:

नमस्कार! मेरा नाम राज नारायण है और मैं हिन्दु इतिहास, विश्वासों और सँस्कृति के बारे में बात करने जा रहा हूँ।

हिंदूइस्म सबसे पुराना जीवन्त और दुनियां का तीसरा बडा धर्म है। एक अरब से ज्यादा हिन्दु 150 विभिन्न देशो में रहते हैं, जिनमें अधिकतर भारत में हैं।

अमेरिका अकेला बीस लाख हिन्दूओं की निवास स्थली है।

हिंदूइस्म के स्त्रोत हिंदू धर्म की सुदूर शुरुआत जानने के लिये हमें 6000 से भी अधिक वर्ष पूर्व जाना होगा

भारतीय उपमहाद्वीप के सरस्वती-सिंधु क्षेत्र में. यह विशाल क्षेत्र दक्षिण मैं श्री लंका और उत्तर में हिमालय के पर्वतों मैं फैला हुआ है.…

... पश्चिम में अरब सागर से पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक। यहाँ सरस्वती सिन्धु सभ्यता का विकास हुआ, जो अंततः दूनियाँ कि सबसे बड़ी एवम सर्वाधिक उन्नत बनी.…

… यहां तक कि मिस्र, मेसोपोटामिया और चीन को भी पछाड़ते हुए यह सभ्यता इस क्षेत्र की दो महान नदी प्रणालियों, सरस्वती और सिंधु के नाम पर है.

शुरुआत के हिन्दु पवित्र ग्रंथों के आधार पर इसको वैदिक संस्कृति कहा जाता है। इस जगह की 1920 में पहली खोज के बाद, इसे हड़प्पा संस्कृति के रूप में भी जाना जाता है। यह कई बेहतरीन तरीके से आयोजित शहरों के आसपास केंद्रित एक शहरी संस्कृति थीं,

जिनमे से कइयों की आबादी 80,000 थी, जो कि उस समय एक दुर्लभ बात थी। शहर व्यापारिक मार्गों से जुड़े हुए थे, जो पश्चिम में मेसोपोटामिया और पूर्व में मध्य एशिया तक फ़ैले हुए थे।

पांच हजार साल बाद पुरातत्वविदों ने खोज की मिट्टी के बर्तनों की,

मुद्राओं,

मूर्तियों,

मोतियों,

गहनों,

उपकरणों,

खिलोनों,

लघु गाड़ियों,

एवं पासे, जो सभी कुछ इशारा करते हैं जीवन कैसा रहा होगा संस्कृति के उदगम पर जो कि आज आधुनिक भारत के रुप में विकसित हुई। समतल पत्थर की मुद्राओं पर लिखावट है और देवताओं, समारोह, चिह्न, लोग, पौधों और जानवरो की छवियाँ है. जबकि उस समय लिखना लोगों में बड़े पैमाने पर प्रचलित था हम अभी तक उसका अर्थ नहीं निकल पाये। इन कलाकृतियों से हम यह सीखते हैं कि कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं, जिनका आज हिंदुओं द्वारा पालन किया जा रहा है, उनसे मिलती जुलती थीं। एक मुद्रा एक ध्यान रत आक्रति दिखतीं हैँ जो विद्वानों के अनुसार भगवान शिव से जुडी हुई है.… … जबकि दूसरी दिखाते हैं कमल आसन को जो आज हठ योग में प्रयोग होता है।

अन्य खोजें सुदूर बीते समय को आज से जोड़ती हैं, जिनमेँ स्वस्तिक शामिल हैं,

देवी माँ की प्रतिमाओं,

शिव लिंग की पूजा, आग की वेदियाँ जो वैदिक लोगों के ओपचारिक अभ्यास दर्शाती हैँ जिन्हे आर्यों के नाम से भी जाना जाता था,

पवित्र स्नान,

पुजारियों,

पवित्र पशुओं,

और प्रदर्शन कला में इस्तेमाल प्रतीकों.

आप पारम्परिक अभिवादन नमस्ते से तो परिचित होंगे।

यहाँ एक छोटी सी मिट्टी की प्रतिमा है जिसमे उसे दर्शाया गया है। और इस मूर्ति में एक औरत को उसके बालों के हिस्से में लाल पाउडर के साथ दर्शाया गया है।

विवाहित महिलाएं आज भी इस रिवाज़ का पालन करती हैं। 2,000 ईसा पूर्व के आसपास सरस्वती-सिंधु संस्कृति में गिरावट आई, कई लोग अधिक उपजाऊ स्थानों को चले गए... ... पूर्वी और मध्य भारत में, विशेष रूप से गंगा नदी के किनारे और उपमहाद्वीप से परे भी.

हिंदू धर्मग्रंथ चार वेद, संस्कृत में रचित हिंदू धर्म की मुख्य पवित्र पुस्तकें, कम से कम 6,000 साल पहले जिनकी रचना हुई होगी.

चारों में सबसे पूर्व रचित ऋग्वेद, बार बार सरस्वतीं की बात करता है.… … हिमालय के पहाड़ों से समुद्र की तरफ बह रही नदियों मैं से सबसे शक्तिशाली के रूप में इसका वर्णन किया.

इस तरह से, हम जानते हैं कि इस पवित्र ग्रन्थ का एक बड़ा हिस्सा 2000 ईसा पूर्व रचा गया था--जब तक कि नदी सूख चुकी थी. वैदिक भजन, भगवान, देवी देवताओं की स्तुति करते हैं और लोगों का एक शक्तिशाली और आध्यात्मिक रुप मैं वर्णन करते हैं,

उनके कुलों, राजाओं और बादशाहों, झगड़े और लड़ाईयां को. उनकी परिष्कृत अर्थव्यवस्था जिसमें कृषि, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य और मवेशी पालन शामिल थे.

वेद देश को सप्त सिंधु कहते हैं, जिसका अर्थ है सात नदियों की भूमि। दोनों शब्द हिंदू और भारत जो संस्कृत शब्द सिंधु से आते हैं, जिसका अर्थ होता है “नदी.” इन वैदिक भजनों में वर्णन है एक विशेष रूप से निर्मित वेदी के आसपास आग की पूजा, यज्ञ का. पुरातत्ववेत्ताओं नें कई सरस्वती-सिंधु शहरों में इस तरह के वेदियों का पता लगाया है.

हिन्दू आज भी इस रुप में अग्नि की पूजा करते हैं।

मूलतः, भजन की इन हजारों ऋचाओं को लिखा नहीँ, लेकिन याद किया गया. आज भी ऐसे पुजारी हैं जो अपनीं स्मरण शक्ति से ऐसे 10,500 छंदों का जाप कर सकते हैं, जिसमेँ 50 घंटे लग सकते हैं।

दर्जनों ऐसे अन्य पवित्र ग्रन्थ हैं जिन्हे हिन्दु सम्मान देते हैं,

जिनमें पुराणों एवम प्रबुद्ध संतोँ के लेखन शामिल हैं। महाकाव्य रामायण और महाभारत पारंपरिक भारत के इतिहास और हिंदू विरासत के भंडार हैं. रामायण कहानी है भगवान राम की, जो कि भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे और उनकी दिव्य पत्नि सीता की.

महाभारत विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य है. यह एक महान साम्राज्य के सिंहासन के लिए चचेरे भाइयों के बीच प्राचीन भारत में एक बड़े पैमाने पर हुए युद्ध के बारे में है.

भगवद गीता नामक एक केंद्रीय प्रकरण संवाद है, कमांडर अर्जुन और...

... भगवान कृष्ण, विष्णु के आंठवें अवतार के बीच, जो कि युद्व के दिन हुआ। महाभारत न्याय के अपने प्रमुख संदेश के साथ, दुनिया में सबसे व्यापक शास्त्रों में से एक बना हुआ है. हिन्दू पवित्र संगीत, नृत्य, नाटक और कला इन दो साहित्यिक महाकाव्यों पर भारी पैमाने पर आधारित है.

हिन्दू समाज 600 ईसा पूर्व तक, हिंदूइस्म के मुख्य सामाजिक, धार्मिक और दार्शनिक प्रथाएं जो आज प्रचलित हैं पूणतया स्पष्ट हो गयी थीं.… …. जो उभर कर आयी थी इण्डस- सरस्वती संस्कृति, वेदों, द्रविड़ संस्कृति और आदिवासी धर्मों से.

समाज की एक विशिष्ट विशेषता वर्ण या वर्ग प्रणाली थी.

लोगों को विशिष्ट व्यवसायों के साथ समूहों में वर्गीकृत किया गया था.

माता पिता अपने पेशे या व्यापार में एक मजबूत जमीनी स्तर प्रदान करने के लिये एक युवा उम्र से अपने बच्चों को अपने कौशल

सिखाते थे, जो इन समूहों में अंततः वंशानुगत हो गये.

पुरोहित,

योद्धा,

व्यापारी,

एवं श्रमिक [जिनमें शिल्पी एवम किसान] शामिल थे.

हालांकि, इस वर्ग प्रणाली में विभिन्न वन जनजातियों शामिल नहीं थीं. इनमें वे छोटे समुदाय शामिल नहीँ थे जिन्हे उनके व्यवसायों के स्वच्छ नां होने की वजह से अछूत माना जाता था,

जैसे शमशान भूमि के चांडाल,

मैला ढोने वाले

और चमड़े का काम करने वाले श्रमिक।

इस प्रणाली नें रिश्तेदारी वाले समूहों को पहचान दी और सभी नागरिकों को अधिक से अधिक सामाजिक व्यवस्था, स्थिरता और अपनेपन की भावना दी. जाति की सामाजिक एकजुटता का योगदान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.… ... आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में, सबसे अधिक यह दिखाई देता है विवाह और चुनाव में.

प्राचीन काल में जीवन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए मुश्किल काम था.

महिलाओं पर घर चलाने के की ज़िम्मेदारी थी...

... जबकि पुरुषों पर उनके शिल्प, कृषि और परिवार की सुरक्षा की देखभाल की. सामान्यतया, महिलाएं धार्मिक अनुष्ठानों, उत्सव और सामाजिक संबंधों में समान रूप से भाग लिया करती थीं. भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक नेता कुछ महिलाएं थीं. कुछ नें तो वैदिक भजनों की भी रचना की थी।.

1000 ईसा पूर्व से गुप्ता काल तक, जो मध्य 6 वि शताब्दी ई. में समाप्त हुआ, महान वैज्ञानिक एवम गणितीय उन्नति का समय था.

हिन्दुओं ने उस गिनती प्रणाली को विकसित किया जिसे हम आज इस्तेमाल करते हैं, इसमें गणितीय शून्य की अवधारणाएं और दशमलव भी शामिल हैँ. भारतीय खगोलविदों को जानकारी थी की पृथ्वी सूर्य के चक्कर काटती हैं और उन्होने एक वर्ष की गणना अद्भुत परिशुद्धता के साथ की थी. चिकित्सा इतनी उन्नत थी कि डाक्टर जटिल शल्य चिकित्सा करने में सक्षम थे.…

... जिनकी 18 वीं सदी तक यूरोप में बराबरी नहीं थी.

भारत दुनिया के लिए इस्पात का अग्रणी आपूर्तिकर्ता था. 400 ईस्वी में इसकी ढलाई के कारख़ानों नें एक ऐसा लौह स्तम्भ बनाया था जो आज भी खड़ा है और जिसमें कभी ज़ंग नहीँ लगा है.

आधुनिक विज्ञान इस उपलब्धि की बराबरी नहीं कर सकता है.

हज़ारों सालों से भारत एक चौथे मानव परिवार के लिये निवास रह है.

इसे धन और ज्ञान वाले एक राष्ट्र के रूप में सम्मानित किया गया है

और, यक़ीनन, यह आज दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में प्रसिद्ध है.

हिंदू विश्वास, प्रथाएं और सन्त। इस भूमि का धर्म हिंदूइस्म, हमेशा से खुले दिमाग एवम सहिष्णु रहा है इस विश्वास के साथ कि सत्य एक है, मार्ग अनेक हैं.

अतः हिन्दु सब धर्मों का सम्मान करते हैं. हिंदूइस्म ही एक ऐसा प्रमुख धर्म है जो की भगवान को दोनों पुरूष और महिला के रुप में पूजा करता है, साथ ही साथ सगुण एवम निर्गुण रुप में भी. हिंदू धर्म के लिए मूल संस्कृत नाम है सनातन धर्म, जिसका अर्थ अविनाशी धर्म है.

ज्यादातर हिन्दु एक सर्वोच्च भगवान मैं विश्वास करते हैँ,

बहुत से देवी और देवताओं में, आध्यात्मिक दुनियाओं में,

आत्मा की दिव्यता, धर्म, कर्म, पुनर्जन्म, प्रभु प्राप्ति और मुक्ति एवम पुनर्जन्म में. सर्वोच्च भगवान, क्षेत्र और संप्रदाय के आधार पर, विभिन्न नामों से जाना जाता है:

ब्रह्म, भगवान, शिव, शक्ति, विष्णु और अन्य नामों से. चाहे पुरुष या स्त्री वह सर्व शाक्तिशाली, सब जानने वाला, प्रेम से पूर्णतया ओत प्रोत एवम सर्वव्यापी...

... और, उत्कृष्ट, इससे भी आगे जा के.

भगवान आत्मन, दिव्य आत्मा के रूप में प्रत्येक व्यक्ति के भीतर मौजूद है.

भगवान की प्राप्ति अपने भीतर की दिव्यता का अनुभव बतातीं है. भगवान के साथ इस गहन मुठभेड़ को जीवन के अंतिम लक्ष्य के रूप में माना जाता है.

हिन्दू सिखाते हैं कि हर व्यक्ति भगवांन को व्यक्तिगत रुप से जान सकता है.

हिंदु अन्य देवताओं की पूजा भी करते हैं.

प्रत्येक देवता की अलग शक्तियॉं और ज़िम्मेदारी के क्षेत्र हैं.

उदाहरण के लिए, भगवान गणेश बाधाओं को दूर करने वाले हैं,

सरस्वती ज्ञान की देवी हैं,

और हनुमान सेवा और भक्ति के देवताः हैं. हर एक हिन्दु स्वतंत्रता से उस देवी या देवता को चुनता है जिसकी वह पूजा करना चाहता है. धर्म हिंदू धर्म में एक प्रमुख अवधारणा है.

इसमें नीतिपरायणता, सत्य, पवित्र कानून, नैतिकता, कर्तव्य, न्याय, धर्म और प्रकृति के नियम शामिल हैं.

धर्म का अर्थ है “जिसको धारण किया जा सके”.

अहिंसा का धार्मिक सिद्धांत आज के दिन तक भी महत्वपुर्ण है. महात्मा गांधी ने अहिंसा के साधन का उपयोग कर 1947 में भारत की आजादी का नेतृत्व किया जैसे की शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, बहिष्कार, हड़ताल और भाषण जिनके द्वारा ब्रिटिश शासन को उखाड़ के फैंकने के लिये राष्ट्र को जगाया।

उन्होंने एक बार कहा था, “अहिंसा मानव जाति के हाथों में सबसे बड़ी ताकत हैं. यह आदमी के चातुर्य द्वारा तैयार किये गये विनाश के सबसे ताकतवर हथियार से भी अधिक शक्तिशाली है.“ 1950 के दशक में, मार्टिन लूथर किंग, जूनियर नें गांधी के तरीकों की शक्ति को समझा...

… और भारत में उनके अनुयायियों से मिलने गये. उन्होंने बाद में उन तरीकों का अमरीका के अल्पसंख्यक काले लोगों को नागरिक अधिकार दिलाने की लडाई में इस्तेमाल किया।

उसी तरह, सीजर शावेज ने कैलिफोर्निया के खेत मजदूरों के लिए अधिकार जीते. गांधी ने नेल्सन मंडेला को साउथ अफ्रीका में स्वतंत्रता और नस्लीय समानता की लड़ाई लड़ने के लिये भी प्रेरित किया। आज हर किसी को कर्म की हिन्दु अवधारणा और काऱण और उसके प्रभाव के कानून के बारे में पता है.

इसका मतलब है जो भी कोई व्यक्ति करता है, चाहे अच्छा या बुरा,

अंततः उसको इस जीवन या भविष्य के जीवन में वापिस मिलेगा। इसे व्यक्त करने का एक लोकप्रिय तरीका है, “जो करके छोड़ा जाता है, वही वापस आता है.” पुनर्जन्म एक प्रमुख भारतीय विश्वास है, जिसके अनुसार आत्मा दुबारा जन्म लेती है, एक नये शरीर में... ...बार बार, सभी अनुभवों के माध्यम से विकसित और परिपक्व करने के लिए जो मानव जीवन उपलब्ध कराता है. आखिरकार, हर आत्मा परमेश्वर के साथ अपनी एकता को साकार करने से मोक्ष को प्राप्त होती है और फ़िर पुनर्जन्म नहीँ होता है.

हिंदु एक शैतान या एक शाश्वत नरक में विश्वास नहीं करते.

एक हिन्दू के जीवन में पूजा का मुख्य स्थान है.

इसलिए, हर हिन्दु घर में एक पूजा स्थल होता है. यह इतना सरल भी हो सकता है जैसे एक खाना जिसमे देवी देवताओं की तसवीरें हों,

या फिर एक पूरा कमरा जो परिवार की दैनिक पूजा को समर्पित हो. एक पूजा अनुष्ठान जिसे पूजा कहा जाता है, अलंकृत तरीके से की गयी या फ़िर बहुत साधारण तरीके से हर दिन

मन्दिर या घर के मन्दिर में जिसे किया जाय आशीर्वाद एवम प्रसन्नता के लिये देवता का आह्वान।

पूजा समारोह में देवता की छवि का स्नान, पवित्र जप भी शामिल है... …भोजन, फूल, धूप एवम अन्य पवित्र पदार्थोँ का चढ़ावा और रोशनी द्वारा आरती करना।

हिन्दू प्रति दिन योग अभ्यास करते हैं, जिसे साधना कहा जाता है. अक्सर ज़मीन पर योग आसन में बैठ कर, वे जाप करते हैं, भक्तिपूर्ण भजन गाते हैं..... …माला पर गिनती करते हुए भगवान के नाम को दोहराते हैं, या फ़िर केवल मात्र ध्यान करती हैं स्थिरता और मौन में.

मंदिर का भगवान के घर के रुप में सम्मान किया जाता है.

भारत में लाखों हैं, बहुत से अति प्राचीन हैं. इनमें से अति महत्वपूर्ण रहस्यमय तरीके से रचित किये गये भवन सेंकड़ों एकड़ों मैं फैले हैँ और रोज़ इनमें हजारों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं. हर हिन्दू से अपेक्षा की जाती है की वेह दुर दराज स्थित मन्दिरोँ और पवित्र स्थलियों पर तीर्थ यात्रा हेतु जाएँ। यह तीर्थ यात्राएं धर्म को एकीकृत करती हैं क्योंकि पूरे उपमहाद्वीप के लाखों लोग यात्रा करते हैं और उनकी आपस में बातचीत होती है. हिंदूइस्म में साधु और संतोँ का समृद्व इतिहास है, जिनमे सभी जातियों के पुरुष व महिलाएं शामिल हैं. महान संतों में से कुछ नेँ उपनिषदों और संबंधित शास्त्रों की विस्तृत व्याख्या लिखी थी...

…जैसे कि 8 वीँ सदी सी ईं में आदि शङ्कराचार्य,

11 वीं सदी में रामानुजा…

और वल्लभाचार्य 15 वीं में. अन्य, जिनमे शामिल थे, संमबंदार मीराबाई और तुकाराम, जिन्होंने भक्ति गीतोँ के माध्यम से भगवान के अपने अनुभव को व्यक्त किया. हाल के संतों में शामिल हैं श्री रामकृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, आनन्दमयी माँ, स्वामिनारायण एवम शिरडी साईं बाबा। लाखों स्वामी और अन्य पुन्य आत्माएं हिन्दु धर्म के भीतर आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान करते हैं. स्वामियों नें दुनियां को त्यागा है और आध्यत्मिक जीवन को पुरे समय के लिये अपनाया है. इनमें विशेष हैं गुरुजन ; प्रबुद्ध पुरुष एवम महिलाएं जो की धर्मिक शिक्षकों के रुप में सेवा करते हैं.

कुछ गुरुओं के अनुयायियों की संख्या लाखों में है. अन्य विनम्र तपस्वी हैं.

हिंदू धर्म का कोई केंद्रीय संगठन और कोई एक मात्र सिद्धान्त नहीं है.

कोई भी एक व्यक्ति या संस्था प्रभार में नहीँ है. इसके बजाय, हज़ारों गुरुओं की स्वतन्त्र वंशावलियाँ, आध्यात्मिक परम्पराये, मठ व्यवस्थाये और धर्मिक संस्थाएं हैं.

हिन्दू त्यौहार हिन्दू त्योहारों से प्यार करते हैं और हर साल बहुत से पवित्र दिन उत्साहपूर्वक मानते हैं.

सबसे बड़ा दीवाली, या दीपावली, रोशनी का त्योहार कहा जाता है. यह पांच दिवसीय समारोह अक्टूबर या नवम्बर मैं नये चॉंद के आसपास मनाया जाता है,

... अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत मनाता है. हज़ारों छोटे दिये जिनमें पारम्परिक मिटटी से निर्मित तेल से जलनें वाली दिये हर जगह रखे जाते हैं,

और आतिशबाजी मानव जाति के लिए आशा का संकेत देती है. यह भारत में राष्ट्रीय अवकाश का दिन है और कई अन्य देशो में भी जहाँ हिन्दुओं की आबादी अधिक है। बराक ओबामा पहले अमरीकी राष्ट्रपति थे जिन्होने वाइट हाउस में दिवाली मनायीं। राष्ट्रपति ओबामा : “में आपको शुभ दिवाली की शुभकामनाएं देता हूँ और साल भी मुबारक हो.” एक विशेष त्योहार, कुंभ मेला, चार पवित्र नदी स्थलों पर हर तीन वर्ष में मनाया जाता है. 2013 का कुम्भ मेला प्रयाग में मनाया गया जो कि आधुनिक समय में उत्तर भारत का इलाहबाद है.

भारत और दुनिया भर के 1300 लाख लोगों नें वहां तीर्थ यात्रा की.

एक दिन पूरे 300 लाख तीर्थयात्री उपस्थित थे.

यह कभी भी धरती पर आयोजित सबसे बड़े मानव समूह का एकत्रित होना था.

हिंदू धर्म हजारों सालों से कायम है, अपने धर्म, आस्था और संस्कृति के कारण... ... प्रत्येक हिन्दू में एक अनूठी और मज़बूत पहचान, परिवार और आध्यात्मिक उद्देश्य की भावना डाले हुए है. यह कायम हैं क्योंकि यह एक गतिशील धर्म हैं जो अभ्यास की पूरी स्वतन्त्रता देता है.… … यह स्वीकार करता है कि भगवान की पूजा के कई तरीके हैं और प्रदान करता है त्यौहार, मन्दिर, तीर्थयात्रा, गुरु जन और शास्त्र जो पथ को उजागर करते हैं, जिससे जीवन उत्सव की तरह ज़िया जाता है.

हमें आशा है कि इस वृत्तचित्र से आपकी हिंदूइस्म और ईसके ईतिहास की समझ में वृधि हुई होगी।